धर्मज्ञो धर्मकर्ता च सदा धर्मपरायणः। तत्त्वेभ्यः सर्वशास्त्रार्था- देशको गुरुरुच्यते॥

धर्म को जाननेवाला, धर्म के अनुसार आचरण करनेवाला, सदा धर्मपथ पर चलने वाला
और सब शास्त्रों के तत्वों के अनुसार आदेश देने वाला गुरु कहा जाता है।

कुटी का महत्व

कुटी के स्थान पर कहा जाता है की यहां पर शुक देव जी महाराज की
पाकशाला ( भण्डारा) चला करता था उसी स्थान पर खिचडी वाले बाबा ने कई वर्षों तक
तप किया।

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About Khichdi Wala Ashram

यह स्थान साधु संतो का पवित्र स्थल है। यही पर बाबा शारदादास जी महाराज अनेको
अद्भुत जडी बुटियों के द्वारा रोगों का रोग दूर करते थे। मान्यता है
अन्दुत शक्ति सिद्धियों के प्रभाव के कारण सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है
तप का शाब्दिक अर्थ है “तपना या तपाना लेकिन अध्यात्म और व्यवहार मे इसका अर्थ
होता है कठिन अनुशासन, एकाग्रता दृढता और त्याग की भावना ।